बेवक्त की घंटी
बेवक्त की घंटी आज प्रातः मुझे गाज़ियाबाद से आगे एक कॉलेज में बच्चे के प्रवेश के सिलसिले में जाना था।
बेवक्त की घंटी आज प्रातः मुझे गाज़ियाबाद से आगे एक कॉलेज में बच्चे के प्रवेश के सिलसिले में जाना था।
एक आदमी, अनेक ज़िंदगियाँ (एक सच्ची कहानी) छोटा-सा गाँव। चारों तरफ खेत ही खेत। मीलों बंजर भूमि के बीच बसा
رشتوں کی اہمیت اور ضرورت رشتے… اللہ تعالیٰ کی عطا کردہ وہ نعمت ہیں جن کے بغیر زندگی کی رونق
समय का आईना आज सुबह जब मैं प्रातः भ्रमण करके घर लौट रहा था, तो आदतन मेरे कानों में इयरफ़ोन
अंधेरी रात का डर यह काफ़ी पुरानी और विशाल इमारत थी। कभी इसमें एक स्कूल चला करता था। उसके प्रिंसिपल
“गरीबी इंसान से क्या नहीं करवा देती!” एक माँ का ऐसा त्याग, जिसे देखकर आज भी मन भर आता है
ایک وقت تھا… بارش کا وہ موسم اور غریب کی بے بسیاب نہ وہ دور رہا، نہ وہ کچی جھونپڑیاں
وقت کی اہمیت کا احساس مجھے آج اس شدت سے ہوا کہ شاید زندگی میں کبھی میرے ضمیر نے اس
कब्र बोलती हैं आज बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहा था तो मन में ख्याल आया कि क्यों न कब्रिस्तान
ताज़गी केवल सब्ज़ियों में नहीं, विचारों में भी होनी चाहिए सब्जी की ताज़गी केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि